21 वी सदी के साथ भारत में अनेकों टी वी चैंनलों का आगमन हुआ। इनमें बहुत बढी संख्या न्यूज चैंनलो की थी। दूदर्शन के एकाधिकार का समय गुजर चुका था। प्रतियोगिता बढ़ जाने के कारण प्रत्येक चैनल एक दूसरे को पीछे छोडने की होड़ में लगे
हुए है। इस होड़ में वह अपनी दिखाई जाने वाली सामाग्री पर
अधिक ध्यान नही दे रहे है। वह दर्शकों को अश्लीलता व हिंसा अधिक परोस रहे हैं।
ऐसे में समाज पर जो बुरा प्रभाव पड़ रहा है,उसकी तरफ किसी का भी ध्यान नही है। वे तो मस्त है,पैसे की माया में। उनको सिर्फ पैसे से मतलब है,जनता जाए भाड़ में। समाज का सबसे अधिक समझदार वर्ग ही अगर अपने दायित्त्व को नही समझेगा, तो समाज की दिशा कैसी होगी,ये आप जानते ही है। समाज को सही रास्ता देने की जगह, पथ भ्रष्ट करना सही नीति नही हैं। ये जरूर है कि आज के समय में प्रत्येक कर्मचारी को अधिक वेतन देना पड़ता है। ऐसे में अधिक लाभ कमाना उनकी मजबूरी बन चुकी है। परंतु अपनी मजबूरी के लिए जनता को पथ भ्रष्ट करना सही नही है। क्या सूचना देने का यही सही तरीका है ? क्या इस नीति में कुछ परिवर्तन नही किए जा सकते ? ऐसी कोई समस्या नही जिसका हल ना किया जा सके। जरुरत है, सभी चैंनल मिलकर इस समस्या का हल करे, क्योंकि अगर सरकार कड़े कदम उठाएगी तो मीड़िया की स्वतंत्रता पर सवाल उठेंगे । अतः समय रहते ही सोच विचार करना सही होगा
सुमीत विर्क
सी.डी .एल.यू.जनसंचार विभाग सिरसा
हुए है। इस होड़ में वह अपनी दिखाई जाने वाली सामाग्री पर
अधिक ध्यान नही दे रहे है। वह दर्शकों को अश्लीलता व हिंसा अधिक परोस रहे हैं।
ऐसे में समाज पर जो बुरा प्रभाव पड़ रहा है,उसकी तरफ किसी का भी ध्यान नही है। वे तो मस्त है,पैसे की माया में। उनको सिर्फ पैसे से मतलब है,जनता जाए भाड़ में। समाज का सबसे अधिक समझदार वर्ग ही अगर अपने दायित्त्व को नही समझेगा, तो समाज की दिशा कैसी होगी,ये आप जानते ही है। समाज को सही रास्ता देने की जगह, पथ भ्रष्ट करना सही नीति नही हैं। ये जरूर है कि आज के समय में प्रत्येक कर्मचारी को अधिक वेतन देना पड़ता है। ऐसे में अधिक लाभ कमाना उनकी मजबूरी बन चुकी है। परंतु अपनी मजबूरी के लिए जनता को पथ भ्रष्ट करना सही नही है। क्या सूचना देने का यही सही तरीका है ? क्या इस नीति में कुछ परिवर्तन नही किए जा सकते ? ऐसी कोई समस्या नही जिसका हल ना किया जा सके। जरुरत है, सभी चैंनल मिलकर इस समस्या का हल करे, क्योंकि अगर सरकार कड़े कदम उठाएगी तो मीड़िया की स्वतंत्रता पर सवाल उठेंगे । अतः समय रहते ही सोच विचार करना सही होगासुमीत विर्क
सी.डी .एल.यू.जनसंचार विभाग सिरसा
5 comments:
भावों की अभिव्यक्ति मन को सुकुन पहुंचाती है।
लिखते रहिए लिखने वालों की मंज़िल यही है ।
कविता,गज़ल और शेर के लिए मेरे ब्लोग पर स्वागत है ।
मेरे द्वारा संपादित पत्रिका देखें
www.zindagilive08.blogspot.com
आर्ट के लिए देखें
www.chitrasansar.blogspot.com
आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्लाग जगत में स्वागत है। आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्दी चिटठा जगत को समृद्ध करने और हिन्दी पाठको को ज्ञान बांटने के साथ साथ खुद भी सफलता प्राप्त करेंगे । हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।
ब्लॉग जगत में स्वागत है
अब, आज 27 नवम्बर के दिन
आईये हम सब मिलकर विलाप करें
सुमित,
कई उदाहरणों से लगता है अब जर्नलिज्म मिशन नहीं रहा बल्कि फिक्शन रह गया है। और अगर ये चैनल मिशन कायम रखने का दावा भी करें तो वो मिशन है सिर्फ टीआरपी बढ़ाने का। साझी बात कही है आपने।
har taraf bhagan bhag machi hai. narayan narayan
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